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आस्था
इसमें उन विषयों पर आधारित प्रश्नों को प्रस्तुत किया गया है जो उन बातों से संबंधित हैं जिनका एक मुसलमान को अल्लाह सर्वशक्तिमान के प्रति विश्वास और आस्था रखना अनिवार्य है, तथा ईमान (विश्वास) के छह स्तंभों में से शेष और अन्य परोक्षीय बातों, तथा उस आस्था के ख़िलाफ़ और विपरीत बातें जिनसे सावधान रहना चाहिए।
इस्लामी शरीयत में सभी मामलों के समाधान का समावेश
सहेजेंइस्लामी अक़ीदा एक गंभीर व्यावहारिक पद्धति है, और अक़ीदा पर महत्वपूर्ण पुस्तकें
इस्लामी अक़ीदा कोई सैद्धांतिक और दार्शनिक पद्धति नहीं है; बल्कि यह एक गंभीर व्यावहारिक पद्धति है। अतः अमल (कर्म) इस अक़ीदा का एक मूल तत्व है। इसलिए अहले सुन्नत इस बात पर एकमत हैं कि ईमान "कौल और अमल" (कथनी और करनी) का नाम है — यानी जुबान से कहना, दिल से मानना और अंगों से उसपर अमल करना। सही अक़ीदा सीखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसे उसके जानकार और उस पर अमल करने वालों से सीधा सीखा जाए। जो लोग ऐसा करने में सक्षम हैं, उनके लिए यह सबसे सुरक्षित और सबसे लाभदायक तरीक़ा है। और जिनके पास यह सुविधा नहीं है, वे भरोसेमंद किताबों और विद्वानों के व्याख्यानों से सीख सकते हैं। अक़ीदा पर उपयोगी पुस्तकों के लिए विस्तृत उत्तर देखें।सहेजेंईसाइयों के निकट मोक्ष के सिद्धांत पर चर्चा
मुसलमानों का मानना है कि ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) सूली पर नहीं मरे थे और न ही किसी बलिदान, या किसी मोक्ष या किसी त्रिदेव का अस्तित्व है। इसी तरह, मुसलमान वंशानुगत पाप के अस्तित्व में भी विश्वास नहीं करते, क्योंकि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के पाप को अपने ऊपर नहीं लेता और न ही उसे छुड़ाने के लिए खुद को बलिदान करता है। अल्लाह ने तौबा करने वालों से उनकी तौबा क़बूल करने का वादा किया है क्योंकि पाप करने वाले की तौबा के माध्यम से पाप को क्षमा करना ही धर्मी और दयालु अल्लाह के लिए उचित है, न कि हत्या, सूली और रक्तपात। मसीह ने अच्छे कार्यों और धार्मिकता के महत्व पर जोर दिया और अपने लोगों को उस छुटकारे (मोक्ष) के बारे में नहीं बताया जिसके द्वारा वे क़ियामत के दिन हिसाब से बच जाएँगे।सहेजेंअल्लाह के कथन : (إِنَّ الدِّينَ عِنْدَ اللَّهِ الْإِسْلَامُ) की व्याख्या
सामान्य अर्थ में इस्लाम का मतलब है : सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के प्रति समर्पण, अधीनता और आज्ञाकारिता, तथा अकेले उसी की इबादत करना जिसका कोई साझी नहीं है। विशिष्ट अर्थ में इस्लाम से अभिप्राय : वह दीन (धर्म) है जिसे हमारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं, और जिसके अलावा अल्लाह किसी से भी कोई और धर्म स्वीकार नहीं करेगा।सहेजेंवह अपने पिता और अपनी फूफियों से बात नहीं करता और न नमाज़ पढ़ता है, तथा अल्लाह तआला के बारे में बुरा ख़्याल रखता है
सहेजेंउस व्यक्ति का खंडन जो यह दावा करता है कि अल्लाह लोगों को यातना देना पसंद करता है
सहेजेंउन लोगों का खंडन जो कहते हैं कि उपासना हर किसी से स्वीकार की जाती है, चाहे उसका अक़ीदा कुछ भी हो
सहेजेंक्या टेलोमेरेस एंजाइम मृत्यु को रोक सकता है?
सहेजेंहज्रे अस्वद को चूमने की हिकमत
सहेजेंक्या हमारे सभी मामलों को अल्लाह को सौंपना अनिवार्य है?
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