अंतर्वस्तु
हम महान अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह आपके ईमान में वृद्धि करे और आपका सीना (दिल) इस्लाम के लिए खोल दे।
आपके प्रश्न में दो विषय हैं :
पहला विषय : सिर के बाल कटवाने का हुक्म
शैख़ अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ रहिमहुल्लाह कहते हैं :
"महिला के बाल काटने में हमें कोई मनाही ज्ञात नहीं है। निषिद्ध (हराम) केवल सिर को पूरी तरह मुंडाना है। इसलिए आपके लिए सिर मुंडाना जायज़ नहीं है। लेकिन यदि आप बालों की लंबाई या घनत्व कम करने के लिए कुछ बाल काटती हैं, तो हम इसमें कोई हर्ज़ नहीं जानते हैं। परंतु बेहतर यह है कि बाल इस प्रकार काटे जाएँ जो स्वयं आपको और आपके पति—दोनों को पसंद हों। साथ ही, बाल काटने में काफ़िर महिलाओं (के स्टाइल) की नकल नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यदि बाल बहुत लंबे या बहुत घने हों, तो इससे उन्हें धोने और कंघी करने (संवारने) में कठिनाई होती है। अतः यदि बाल अधिक हैं और कोई महिला उनकी लंबाई या अधिकता की वजह से कुछ बाल काट लेती है तो इसमें कोई हानि नहीं है। इसी प्रकार यदि कुछ बाल काटने में कोई सुंदरता हो और वह महिला तथा उसका पति दोनों उसे पसंद करें, तो इसमें भी हम कोई आपत्ति नहीं पाते हैं। लेकिन बिना किसी बीमारी या कारण (आवश्यकता) के पूरे सिर के बाल मुंडाना जायज़ नहीं है। और अल्लाह ही तौफ़ीक़ प्रदान करने वाला है।" [देखें “फ़तावा अल-मर्अतिल-मुस्लिमह” भाग 2, पृष्ठ 515]।
तथा सहीह मुस्लिम में अबू स-ल-मा बिन अब्दुर्रहमान से से वर्णित है ... उन्होंने कहाः “नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियाँ अपने सिर के बाल इतने छोटे कर लिया करती थीं कि वे 'वफ़रह' के बराबर रह जाते थे।"
"वफ़रह" ऐसे बालों को कहते हैं जो कानों से थोड़ा नीचे तक पहुँचते हों।
इमाम नववी रहिमहुल्लाह ने कहा :
"इस हदीस में महिलाओं के लिए बाल छोटे करने के जायज़ होने का प्रमाण है।" उद्धरण समाप्त हुआ।
काफ़िर और फासिक़ औरतों की नकल करने से बचना :
महिला को अपने बाल काटते समय काफ़िर (नास्तिक) और फ़ासिक़ (अवज्ञाकारी) महिलाओं की नकल करने से बचना चाहिए।
शैख़ सालेह अल-फ़ौज़ान (हफ़िज़हुल्लाह) कहते हैं :
“महिला के लिए यह जायज़ नहीं कि वह अपने सिर के बाल पीछे से काट दे और किनारों के बाल लंबे छोड़ दे; क्योंकि यह उसके बालों की संरचना को बिगाड़ना और उसके बालों से खिलवाड़ करना है जो उसकी सुंदरता का हिस्सा हैं। साथ ही इसमें काफ़िर औरतों की नकल करना भी शामिल है। इसी तरह, बालों को विभिन्न स्टाइलों में काटना जिनके नाम काफ़िर महिलाओं या जानवरों के नाम पर हों, जैसे "डायना कट" (एक नास्तिक औरत का नाम), "शेर कट", "चूहा कट"; क्योंकि नास्तिकों और जानवरों की नकल करना निषिद्ध है, और क्योंकि इसमें एक औरत के बालों के साथ छेड़छाड़ करना शामिल है, जो उसकी सुंदरता का हिस्सा हैं।” “फ़तावा अल-मर्अतिल-मुस्लिमह” (2/516, 517)।
दूसरा विषय : चेहरे के बाल हटाने का हुक्म
शैख़ मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहिमहुल्लाह ने कहा :
जहाँ तक असामान्य ढंग से उग आने वाले बालों का संबंध है, जैसे कि ऐसी जगहों पर बाल उग आएँ, जहाँ सामान्य रूप से नहीं उगते, जैसे किसी महिला के मूँछ होना या गालों पर बाल उग आना, तो उन्हें हटाने में कोई हर्ज़ नहीं है ; क्योंकि ऐसे बाल सामान्य नहीं हैं और महिला की सुंदरता को बिगाड़ते हैं।” “फ़तावा अल-मर्अतिल-मुस्लिमह” (2/536, 537)।
स्थायी फ़तवा समिति (अल-लज्नह अद-दाइमा) से महिला के चेहरे के बाल हटाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने उत्तर दिया :
“महिला के लिए मूँछ, जाँघों, पिंडलियों और भुजाओं के बाल हटाने में कोई हर्ज नहीं, तथा यह निषिद्ध ‘नम्स’ (भौहों के बाल उखाड़ने) में शामिल नहीं है।
शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़, शैख अब्दुर्रज़्ज़ाक़ अफीफ़ी, शैख अब्दुल्लाह बिन ग़ुदैयान, शैख़ अब्दुल्लाह बिन क़ऊद।
“फ़तावा अल-लजनह अद-दाइमह” (5/194, 195)।
शरीर के अन्य बाल :
तथा स्थायी समिति से पूछा गया :
एक महिला के अपने शरीर के बाल हटाने का क्या हुक्म है? और अगर यह जायज़ है, तो किसे इसकी अनुमति है?
तो उन्होंने उत्तर दिया :
उसके लिए अपनी भौंहों और सिर के बालों को छोड़कर शरीर के सभी बाल हटाना जायज़ है। अतः उसके लिए इन दोनों को हटाने की इजाज़त नहीं है, न ही अपनी भौंहों के किसी हिस्से को, चाहे शेविंग करके या किसी और तरीके से।
वह महिला इन बालों को स्वयं हटा सकती है, या उसका पति हटा सकता है, या उसका कोई महरम केवल उन स्थानों के बाल हटा सकता है जिन्हें उसे देखने की अनुमति है, अथवा कोई अन्य महिला भी केवल उसके शरीर के उस हिस्से के बाल हटा सकती है जिसे देखना उसके लिए जायज़ है।
शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़, शैख अब्दुर्रज़्ज़ाक़ अफीफ़ी, शैख अब्दुल्लाह बिन ग़ुदैयान, शैख़ अब्दुल्लाह बिन क़ऊद।
“फ़तावा अल-लजनह अद-दाइमह” (5/194)।
अत्यंत गोपनीय अंग (प्राइवेट पार्ट्स) और जांघों के बाल किसी दूसरी औरत या महरम के लिए देखना जायज़ नहीं है।
किन बालों को हटाना हराम है?
महिला के लिए अपने भौंहों के बालों को हटाना, या उसके कुछ हिस्से को हटाना (पतला करना, आकार बदलना) हराम है, चाहे वह किसी भी माध्यम, जैसे शेविंग, कटिंग, या किसी भी हेयर रिमूवल पदार्थ (क्रीम आदि) के उपयोग से हो। क्योंकि यही वह "नम्स" (भौहों के बाल उखाड़ना) है, जिसके करना वाले पर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लानत फ़रमाई है... नामिसा (النَّامِصَة) वह स्त्री जो अपनी भौंहों के बाल या उनका कुछ हिस्सा, अपनी कल्पना के अनुसार सजावट के लिए, उखाड़ती है। तथा मुतनम्मिसा (المتنمصة): वह स्त्री जो किसी से अपने चेहरे के बाल उखाड़ने के लिए कहती है। यह दरअसल अल्लाह की बनाई हुई रचना में परिवर्तन है, जिसकी प्रेरणा शैतान देता है, जिसने आदम की संतान को ऐसा करने का हुक्म देने की कसम खाई थी..”
किताब "अल-फ़तावा अल-जामिआ लिल-मर्अतिल मुस्लिमा” (3/877-879) भी देखें।