यदि ये वेबसाइटें तभी काम करने की अनुमति देती हैं जब व्यक्ति पहले सदस्यता शुल्क अदा करे, तो इनके साथ लेन-देन करना जायज़ नहीं है। क्योंकि इसमें धन के साथ जुआ और अनुबंध के भीतर सूदी लेन-देन पाया जाता है।
डॉ. सामी अस-सुवैलिम (हफ़िज़हुल्लाह) से इसी प्रकार का एक प्रश्न पूछा गया था। तो उन्होंने उत्तर दिया :
अल्लाह के रसूल पर दुरूद व सलाम हो। इसके बाद :
उल्लिखित वेबसाइटें अपने यहाँ मौजूद विज्ञापनों को देखने के बदले कमीशन देती हैं। यह कमीशन दो प्रकार का होता है :
पहला प्रकार : सिर्फ विज्ञापन देखने के बदले कमीशन दिया जाता है, और इसके लिए किसी भी प्रकार की सदस्यता या शुल्क देना आवश्यक नहीं होता। इस प्रकार की कमाई में – इन शा अल्लाह - कोई हर्ज नहीं है, बशर्ते कि विज्ञापन शरई निषेधों (हराम बातों) से मुक्त हों, तथा उनमें किसी हराम चीज़ या बुराई का प्रचार न किया जाता हो।
दूसरा प्रकार : विज्ञापन देखने के साथ-साथ एक गैर-वापसी योग्य सदस्यता शुल्क भी लिया जाता है। इस स्थिति में कमीशन की मात्रा सदस्यता शुल्क की राशि के अनुसार होती है। जितना अधिक सदस्यता शुल्क होगा, उतना अधिक कमीशन मिलेगा। यह वृद्धि एक निश्चित सीमा तक होती है। इन सदस्यता शुल्कों का एक भाग वेबसाइट चलाने वाली कंपनी के खर्चों को पूरा करने में उपयोग किया जाता है, जबकि शेष राशि अन्य सदस्यों में कमीशन के रूप में बाँट दी जाती है। यह स्पष्ट है कि इस प्रकार की व्यवस्था में नकद के बदले नकद का लेन-देन शामिल है।
क्योंकि एक सदस्य जो राशि जमा करता है, उसी राशि से दूसरे सदस्यों को कमीशन दिया जाता है। और दूसरे सदस्यों द्वारा जमा की गई राशि से उसे कमीशन मिलता है। अर्थात् यह प्रक्रिया एक-दूसरे के धन के आदान-प्रदान पर आधारित होती है।
जहाँ तक विज्ञापनों की बिक्री और इसी प्रकार के अन्य स्रोतों से होने वाली आय का संबंध है, तो वह सदस्यता शुल्कों से प्राप्त आय की तुलना में कम होती है।
इसलिए वास्तविक और प्रमुख आय सदस्यता शुल्कों से ही प्राप्त होती है, और उन्हीं से कमीशन का भुगतान किया जाता है।
इस प्रकार की व्यवस्था में नकद के बदले नकद का लेन-देन होता है, जिसमें राशि में अंतर (अधिक या कम होना) भी होता है और भुगतान में विलंब भी होता है। इसके अलावा सब्सक्रिप्शन को लेकर ग़रर (अनिश्चितता और जोखिम) तथा जहालत (लेन-देन की वास्तविक स्थिति का अस्पष्ट होना) भी पाया जाता है। इस प्रकार यह व्यवस्था रिबा (सूद) और मयसिर (जुआ) – दोनों को अपने अंदर समेटे हुए है।‘’ वेबसाइट "अनल मुस्लिम" (मैं मुसलमान हूँ) से उद्धरण समाप्त हुआ।
और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखने वाला है।