रविवार 15 मुहर्रम 1446 - 21 जुलाई 2024
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साल के दौरान अर्जित धन पर ज़कात

प्रश्न

क्या धन पर ज़कात की मात्रा का हिसाब धन के निसाब तक पहुँचने पर लगाया जाना चाहिए या एक साल बीत जाने परॽ यदि निसाब तक पहुँचने के समय धन की राशि 10,000 थी, और एक वर्ष बीतने के बाद धन की राशि 50,000 हो गई, तो धन की ज़कात की गणना किस राशि पर की जाएगीॽ

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

पहला :

पैसों (नक़दी) पर ज़कात अनिवार्य होने के लिए दो शर्तें हैं :

पहली : निसाब तक पहुँचना

दूसरी : उस निसाब पर एक साल का गुज़रना।

अतः अगर पैसा निसाब से कम है, तो उसपर ज़कात अनिवार्य नहीं है।

और अगर कोई धन निसाब तक पहुँच जाए और उसपर एक साल बीत जाए, यानी उसके निसाब तक पहुँचने के समय से एक चंद्र (हिजरी) साल बीत जाए, तो उस समय ज़कात अनिवार्य हो जाती है।

निसाब वह है जो 85 ग्राम सोने, या 595 ग्राम चाँदी के बराबर हो।

ज़कात में जिस मात्रा का निकालना अनिवार्य है वह दसवें हिस्से का एक चौथाई (2.5%) है।

दूसरा :

अगर पैसा निसाब तक पहुँच जाए और वह उदाहरण के तौर पर 1000 हो, फिर साल के आखिर में 5000 हो जाए, तो ज़कात कैसे अदा की जानी चाहिएॽ

इसका विवरण इस प्रकार है : 

1 - यदि यह वृद्धि मूलधन से उत्पन्न हुई है, जैसे कि यदि यह एक हज़ार निवेश किया गया था और उससे चार हज़ार का लाभ हुआ, तो आप वर्ष के अंत में उन सभी पर ज़कात अदा करेंगे, क्योंकि धन पर प्राप्त होने वाला लाभ मूलधन के अधीन है।

2 यदि यह वृद्धि मूलधन से उत्पन्न नहीं हुई है, बल्कि यह वह धन है जो किसी अन्य तरीक़े से अर्जित किया गया है, जैसे कि विरासत, या उपहार, या यह आपके द्वारा बेची गई किसी वस्तु की क़ीमत है, और इसी तरह की अन्य कोई चीज़, तो इसके लिए अलग वर्ष की गणना की जानी चाहिए, जिसकी शुरूआत उस दिन से होगी जिस दिन आप इस वृद्धि के मालिक बने हैं। लेकिन अगर आप उसकी ज़कात हज़ार के साथ पहले ही अदा करना चाहते हैं, तो इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है।

3- कभी-कभी यह वृद्धि धीरे-धीरे होती है, जैसे कि वह धन जो एक व्यक्ति अपने वेतन से बचाता है। चुनाँचे वह एक महीने में 500 और दूसरे महीने में 1000 बचाता है, यहाँ तक कि वर्ष के अंत में उसके पास 4000 जमा हो जाता है। ऐसी स्थिति में आपके पास यह विकल्प है कि आप एक हजार पर वर्ष गुज़रने के साथ ही पूरी राशि पर ज़कात का भुगतान कर दें, और इस तरह आपने उस पैसे पर अग्रिम रूप से जकात का भुगतान किया है जिसपर एक साल नहीं बीता है, या फिर आप प्रत्येक अर्जित धन के लिए एक विशेष (अलग-अलग) वर्ष निर्धारित कर लें। लेकिन इसमें एक तरह की कठिनाई है, क्योंकि आप एक वर्ष में कई बार ज़कात अदा करेंगे।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर