शनिवार 16 ज़ुलहिज्जा 1445 - 22 जून 2024
हिन्दी

पश्चिमी देशों में अनुमेय और निषिद्ध कार्यों का नियम

प्रश्न

मुझे कैसे पता चलेगा कि कौन सा काम ह़राम (निषिद्ध) है और कौन सा काम ह़लाल (अनुमेय) हैॽ इसलिए कि यहाँ जर्मनी में बहुत-से निषिद्ध और संदिग्ध काम हैं। मैंने हमेशा यही पढ़ा है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी जगह पर काम करता है जहाँ शराब या सूअर का मांस बेचा जाता है, तो उसका वहॉं काम करना ह़राम है। लेकिन दो या तीन हफ़्ते पहले एक व्यक्ति ने आपसे एक ऐसी बेकरी में काम करने के बारे में पूछा था, जो एक रेस्तरां के अधीन है और वहॉं सुअर तथा शराब के होने की संभावना है। आप लोगों ने उसे यह उत्तर दिया है कि : आपके लिए वहॉं काम करना जायज़ है, क्योंकि आप एक ऐसे देश में हैं जो मुस्लिम नहीं हैं। अतः मुझे इसके नियम का कैसे पता चलेगा और मैं कैसे जान पऊँगा कि मैं ज़रूरतमंद हूँ या मजबूर हूँॽ मेरा एक मित्र एक बेकरी में काम करता है और वह केवल (ब्रेड में) पनीर डालता है (रख कर सर्व करता है) और अन्य लोग सूअर का मांस (सर्व करते) डालते हैं, लेकिन वह सुअर के मांस के क़रीब नहीं जाता है और न उसे छूता है। तो क्या उसका यह काम जायज़ हैॽ और क्या मेरे लिए उसके घर जाना जायज़ है, यदि वह हमें अपने घर भोजन करने के लिए बुलाए और क्या मैं उसका खाना खा सकता हूँॽ जबकि उसकी पत्नी बीमा कंपनी में काम करती है। मैं जानता हूँ कि बीमा कंपनी में काम करना ह़राम है, तो क्या मेरा उसके पास जाने से बचना सही हैॽ और यदि वह मुझे कोई उपहार भेंट करे तो क्या मुझे उसे स्वीकार करना चाहिए या नहींॽ मुझे उन उपहारों का क्या करना चाहिए जो उसने मुझे कुछ समय पहले दिए थेॽ यदि मैं त्याग का प्रदर्शन करते हुए इन स्थानों पर काम न करूँ और ऐसा काम तलाश करने की पूरी कोशिस करूँ, जिसमें कुछ भी हराम, या संदिग्ध या (स्त्री-पुरुषों का) मिश्रण न हो, या मुझे वहाँ समय पर नमाज़ पढ़ने में कोई रुकावट न हो, तो क्या मेरा ऐसा करना सही है? और जहॉं इस तरह के लोग हों वहॉं काम करने से मेरा इनकार करना सही है या नहीं? अल्लाह की क़सम मैं अपने आप पर बुराई में पड़ने से डरता हूँ। मेरी मदद करें, अल्लाह आप लोगों को अच्छा बदला दे।

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

सर्व प्रथम :

अनुमेय कार्य का नियम : यह है कि वह एक अनुमेय क्षेत्र में होना चाहिए तथा उसमें निषिद्ध कार्य करने पर दूसरों की मदद करना शामिल नहीं होना चाहिए।

इसमें अनुमेय चीज़ों की खरीद-बिक्री और किराये पर देना शामिल है, जैसे खाने की चीज़ें, दवा और उपकरण आदि बेचना। इसी प्रकार इसमें शिक्षण, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, बिजली, बढ़ईगीरी, विनिर्माण और अन्य असंख्य अनुमेय कार्यों में नौकरियाँ शामिल हैं।

जहाँ तक निषिद्ध कार्य का सवाल है, तो यह ब्याज का लेन-देन करने वाले बैंकों में काम करना, या वाणिज्यिक बीमा कंपनियों में काम करना, या मदिरा का परिवहन करना, या सूअर का पालन करना, या ब्याज के लेन-देन को लिखना, या जुआघर तैयार करना, या ऐसी चीजें बेचना जिन्हें निषिद्ध उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने की प्रबल संभावना हो, जैसे किसी डाकू को हथियार बेचना, और अन्य चीजें जिन्हें निषिद्ध कार्य का इरतिकाब करना या सीधे या लगभग सीधे तौर पर इसमें मदद करना समझा जाता है।

जहाँ तक दूरगामी सहायता की बात है जबकि पाप में सहायता करने का इरादा बिल्कुल न हो : तो यह हराम (निषिद्ध) नहीं है, जैसे किसी काफिर, सूदखोर और जुआरी को अनुमेय भोजन बेचना। यहाँ यह नहीं कहा जा सकता कि भोजन से उसका पोषण होता है और पाप के काम करने के लिए उसे शक्ति प्राप्त होती है। यदि दूरगामी सहायता निषिद्ध होती, तो बहुत ही कम मामलों को छोड़कर लोगों को कभी भी अनुमेय काम नहीं मिलता।

यही कारण है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथी यहूदियों के साथ खरीद-फरोख्त, किराये आदि का लेन-देन करते थे। इस तथ्य पर ध्यान दिए बिना कि वे (यहूदी) पैसे और व्यापार से लाभान्वित होते है।

अतः यदि कार्य अपने आप में अनुमेय है और उसमें किसी की निषिद्ध कार्य करने में सीधे तौर पर सहायता करना नहीं पाया जाता है: तो वह काम जायज़ है।

यही वह नियम (मानक) है जिसका इस स्थान पर किसी कार्य के जायज़ अथवा ह़राम होने के संबंध में किया जा सकता है।

अधिक लाभ के लिए देखिए : प्रश्न संख्या : (247586) का उत्तर।

इसके आधार पर : यदि कोई बेकरी है जो अनुमेय ब्रेड बेचती है और उदाहरण के लिए, शराब के साथ मिश्रित निषिद्ध ब्रेड बेचती है, और कर्मचारी का काम अनुमेय ब्रेड तक ही सीमित है, और वह किसी भी तरह से निषिद्ध ब्रेड की (तैयारी में) सहायता नहीं करता है, तो उसका यह काम तभी जायज़ है जब उसे उस काम की सख्त ज़रूरत हो, जबकि उसे दूसरी नौकरी की तलाश करते रहना चाहिए। क्योंकि बुराई को देखने से उसके ऊपर यह अनिवार्य हो जाता है कि वह बुराई से रोके, जबकि हो सकता है कि वह बुराई से रोकने में सक्षम न हो, इसलिए ऐसी स्थिति में वह स्थान छोड़ना उसके लिए आवश्यक हो जाता है। जैसा कि सर्वशक्तिमान अल्लाह का यह कथन है :

وَقَدْ نَزَّلَ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ أَنْ إِذَا سَمِعْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلَا تَقْعُدُوا مَعَهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُوا فِي حَدِيثٍ غَيْرِهِۚ إِنَّكُمْ إِذًا مِّثْلُهُمْۗ إِنَّ اللَّهَ جَامِعُ الْمُنَافِقِينَ وَالْكَافِرِينَ فِي جَهَنَّمَ جَمِيعًا

النساء/140

''और अल्लाह ने तुम्हारे लिए अपनी पुस्तक में (यह आदेश) अवतिरत किया है कि जब तुम सुनो कि अल्लाह की आयतों का इनकार किया जा रहा है तथा उनका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है, तो ऐसा करने वालों के साथ न बैठो, यहाँ तक कि वे दूसरी बात में लग जाएँ। अन्यथा तुम भी उन्हीं जैसे हो जाओगे। निश्चय अल्लाह मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) और काफ़िरों को एक साथ जहन्नम में इकट्ठा करने वाला है।” (सूरतुन-निसा : 140)

इस आयत की तफ़सीर में अबू बक्र जस्सास "अहकामुल-कु़रआन" (2/407) में कहते हैं :

''इस आयत से यह पता चलता है कि बुराई करने वाले को बुराई करने से रोकना अनिवार्य है। यदि उसके लिए बुराई को रोकना संभव नहीं है, तो बुराई को नकारने ही का हिस्सा है उसके प्रति घृणा व्यक्त करना, तथा बुराई करने वाले के साथ बैठना छोड़ देना और उसके पास से उठ जाना, यहाँ तक कि वह ऐसा करना बंद कर दे और उसके अलावा एक अन्य स्थिति में आ जाए।” उद्धरण समाप्त हुआ।

शैख़ इब्ने उसैमीन रहिमहुल्लाह से पूछा गया : सोना बेचने वाली दुकानों के उन मालिकों के यहाँ काम करने का क्या हुक्म है, जो अवैध लेनदेन करते हैं, चाहे वे सूदी लेनदेन हों, या निषिद्ध चालबाजियाँ, या धोखाधड़ी या अन्य ऐसे लेन-देन हों जो शरीयत के अनुसार वैध नहीं हैं।

तो उन्होंने उत्तर दिया :

“इन लोगों के पास काम करना ह़राम है जो सूद, या धोखाधड़ी, या इसी तरह की अन्य ह़राम चीज़ों का लेनदेन करते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान अल्लाह का फ़रमान है :

وَلَا تَعَاوَنُوا عَلَى الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ

المائدة/2

''तथा पाप और अत्याचार में एक-दूसरे की सहायता न करो।” [अल-मायदा : 2]

और फ़रमाया :

وَقَدْ نَزَّلَ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ أَنْ إِذَا سَمِعْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلا تَقْعُدُوا مَعَهُمْ حَتَّى يَخُوضُوا فِي حَدِيثٍ غَيْرِهِ إِنَّكُمْ إِذاً مِثْلُهُمْ إِنَّ اللَّهَ جَامِعُ الْمُنَافِقِينَ وَالْكَافِرِينَ فِي جَهَنَّمَ جَمِيعاً

النساء/140

''और अल्लाह ने तुम्हारे लिए अपनी पुस्तक में (यह आदेश) अवतिरत किया है कि जब तुम सुनो कि अल्लाह की आयतों का इनकार किया जा रहा है तथा उनका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है, तो ऐसा करने वालों के साथ न बैठो, यहाँ तक कि वे दूसरी बात में लग जाएँ। अन्यथा तुम भी उन्हीं जैसे हो जाओगे। निश्चय अल्लाह मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) और काफ़िरों को एक साथ जहन्नम में इकट्ठा करने वाला है।” (सूरतुन-निसा : 140)

तथा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फ़रमान है :

''तुम में से जो कोई बुराई देखे तो वह उसे हाथ से बदल दे, यदि वह ऐसा करने में सक्षम न हो, तो अपनी ज़बान से (रोके) और यदि यह भी न कर सके, तो अपने हृदय से (उसे बुरा जाने।)” जबकि उनके पास काम करने वाला व्यक्ति कुछ भी नहीं बदलता है, न अपने हाथ से, न अपनी ज़बान से और न अपने दिल से। इसलिए वह रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अवज्ञा करने वाला है।” (फ़िक़्ह व फ़तावा अल-बुयू', पृष्ठ संख्या : 392)

अतः आपके इस दोस्त को चाहिए कि कोई दूसरी नौकरी तलाश करे जिसमें वह बुराई देखने से बच सके।

परंतु जब तक वह सूअर के मांस के निकट नहीं जाता और न ही किसी प्रकार उसमें सहयोग करता है : तब तक उसका वेतन ह़लाल है, क्योंकि उसका यह वेतन ह़लाल रोटी तैयार करने में उसके काम के बदले में है। लेकिन वह बुराई की निंदा न करने के कारण पाप का भागी है, और यही कारण है कि उसके लिए दूसरी नौकरी की तलाश करना आवश्यक हो जाता है।

इस प्रकार आप जान सकते हैं कि उसका खाना खाने या उसका उपहार स्वीकार करने में आपपर कोई हर्ज नहीं है, क्योंकि उसका वेतन हलाल है।

दूसरा :

वाणिज्यिक बीमा कंपनियों में काम करना ह़राम है,  क्योंकि वाणिज्यिक बीमा सूदखोरी, जुए और सट्टे पर आधारित होता है। जैसा कि हम प्रश्न संख्या (130761) और प्रश्न संख्या (205100) के उत्तर में बता चुके हैं।

लेकिन वह माल जो उसकी कमाई के कारण हराम है, वह केवल उसकी कमाई करने वाले व्यक्ति पर ह़राम होता है। इसलिए उसे उससे अनुमेय तरीक़े से लेने वाले व्यक्ति पर कोई दोष नहीं है, जैसे कि उपहार या गुज़ारा-भत्ता के रूप में लेना इत्यादि।

तथा प्रश्न संख्या (114798) एवं प्रश्न संख्या (246623) का उत्तर देखें।

इस आधार पर : यदि आप ह़राम बीमा कंपनी में काम करने वाले किसी व्यक्ति की कमाई में से कुछ खा लेते हैं या उपहार के रूप में कुछ स्वीकार कर लेते हैं, तो आप पर कोई दोष नहीं है।

तीसरा :

ह़लाल जीविका कमाने के तरीक़े बहुत हैं, लेकिन इसके लिए तलाश करने और प्रयास करने की आवश्यकता होती है। तथा जो कोई सर्वशक्तिमान अल्लाह से डरेगा, तो अल्लाह उसे जीविका प्रदान करेगा और उसकी मदद करेगा। जैसा कि सर्वशक्तिमान अल्लाह ने फ़रमाया :

وَمَنْ يَتَّقِ اللَّهَ يَجْعَلْ لَهُ مَخْرَجاً • وَيَرْزُقْهُ مِنْ حَيْثُ لا يَحْتَسِبُ وَمَنْ يَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ فَهُوَ حَسْبُهُ إِنَّ اللَّهَ بَالِغُ أَمْرِهِ قَدْ جَعَلَ اللَّهُ لِكُلِّ شَيْءٍ قَدْراً

الطلاق/2،3

''और जो अल्लाह से डरेगा, वह उसके लिए निकलने का कोई रास्ता बना देगा। और उसे वहाँ से रोज़ी देगा जहाँ से वह गुमान नहीं करता। तथा जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करे, वह उसके लिए पर्याप्त है। निःसंदेह अल्लाह अपना कार्य पूरा करने वाला[3] है। निश्चय अल्लाह ने प्रत्येक वस्तु के लिए एक नियत समय निर्धारित कर रखा है।” [सूरतुत-त़लाक़ : 2-3]

अतः ऐसे अनुमेय कार्य की खोज करने का भरपूर प्रयास करें जो मिश्रण से और बुराइयों को देखने से मुक्त हो। इस संबंध में संयम अपनाना सराहनीय है। क्योंकि जो कोई भी संदिग्ध चीज़ों से बचता है, वह अपने धर्म और सम्मान को बचा लेगा और जो कोई भी संदिग्ध चीज़ों में पड़ता है, वह क़रीब है कि ह़राम चीज़ों में फंस जाए। जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फ़रमान है :

''अतः जो कोई संदिग्ध चीजों से बचता है वह अपने धर्म और अपने सम्मान को सुरक्षित कर लेगा, और जो कोई संदिग्ध चीजों में पड़ता है, वह ह़राम चीज़ों में पड़ जाएगा, उस चरवाहे की तरह जो अपनी बकरियों को निषिद्ध भूमि के चारों ओर चराता है; क़रीब है कि उसकी बकरियाँ उसमें चरने लगें।” इसे बुख़ारी (हदीस संख्या : 52) और मुस्लिम (हदीस संख्या : 1599) ने रिवायत किया है।

तथा आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह भी फ़रमाया :

''जिस चीज़ में आपको संदेह लगे, उसे छोड़कर उस चीज़ को अपनाएं जिसमें आपको संदेह न हो।” इसे तिरमिज़ी (हदीस संख्या : 2518) और नसई (हदीस संख्या : 5711) ने रिवायत किया है। इमाम तिरमिज़ी ने कहा : यह हदीस हसन सहीह है, और अल्लामा अलबानी ने "सहीह अत-तिरमिज़ी" में इसे सहीह क़रार दिया है।

और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर