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सूदी बैंक में, ब्याज से सीधे लेनदेन किए और उसमें पैसा जमा किए बिना, काम करना

13-12-2022

प्रश्न 211132

मैं एक देश में बैंक के एक ऐसे विभाग में काम करता हूँ, जो सूदी लेनदेन के साथ व्यवहार नहीं करता है, लेकिन ज्ञात रहे कि केंद्रीय बैंक ब्याज का लेनदेन करता है और यह एक सरकारी संस्थान है। उक्त बैंक में काम करने का क्या हुक्म हैॽ कृपया मुझे इसके बारे में अवगत कराएँ।

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

आपका बैंक में काम करना हराम है, भले ही आप ऐसे विभाग में हों जो सूदी लेनदेन से संबंधित नहीं है। यह बात पर्याप्त है कि “केंद्रीय बैंक” सभी बैंकों का प्रमुख है और अन्य विभागों में काम करना दरअसल सूद के विभागों का पूरक है, तथा बैंक का गठन सभी विभागों से होता है, बल्कि ब्याज पर आधारित सभी संस्थान ऐसे ही होते हैं।

बल्कि विद्वानों ने फतवा दिया है कि ऐसे संस्थानों में गार्ड या ड्राइवर के रूप में भी काम करना जायज़ नहीं है, तो फिर क्लर्क के रूप में काम करना कैसे जायज़ हो सकता हैॽ

शैख इब्ने उसैमीन रहिमहुल्लाह ने कहा :

ब्याज पर आधारित संस्थानों में काम करना जायज़ नहीं है, भले ही आदमी ड्राइवर या गार्ड के रूप में काम करने वाला हो; क्योंकि उसका ब्याज पर आधारित संस्थानों में किसी पद पर काम करने के लिए प्रवेश करने का आवश्यक मतलब यह है कि वह इसका अनुमोदन करता है। क्योंकि जो कोई किसी चीज़ को अस्वीकार करता है, वह उसके लाभ (हित) के लिए कार्य नहीं कर सकता। अतः यदि वह उसके हित के लिए काम करता है, तो वह उससे संतुष्ट है। और जो किसी हराम चीज़ से संतुष्ट है, उसे उसका पाप मिलेगा।

लेकिन जो व्यक्ति सूदी लेन-देन रिकॉर्ड करने, लिखने, भेजने और जमा करने और इसी तरह की अन्य गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल है : तो इसमें कोई संदेह नहीं कि वह उस हराम (निषिद्ध) कार्य को सीधे तौर पर कर रहा है। जबकि जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु की हदीस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित है कि आपने सूद खाने वाले पर और सूद खिलाने वाले पर और सूद लिखने वाले पर और सूद के गवाहों पर ला’नत (धिक्कार) भेजी है। और फरमाया : वे सब (पाप में) बराबर हैं।” इसे मुस्लिम (हदीस संख्या : 1598) ने रिवायत किया है।

“फतावा इस्लामिय्यह” (2/401).

तथा स्थायी समिति से एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पूछा गया जो एक बैंक में नाइट गार्ड (रात्रि चौकीदार) के रूप में काम करता है, और उसका बैंक के लेन-देन से कोई लेना-देना नहीं है। क्या उसे अपना यह काम जारी रखना चाहिए या उसे छोड़ देना चाहिएॽ

तो उन्होंने उत्तर दिया :

एक मुसलमान के लिए ब्याज का लेन-देन करने वाले बैंकों के लिए एक गार्ड के रूप में काम करना जायज़ नहीं है; क्योंकि यह पाप और अत्याचार में एक तरह का सहयोग करना है, जबकि अल्लाह ने ऐसा करने से अपने इस फरमान के द्वारा मना किया है :

وَلا تَعَاوَنُوا عَلَى الْإثْمِ وَالْعُدْوَانِ

المائدة :2

“तथा पाप और अत्याचार में एक-दूसरे का सहयोग न करो।” (सूरतुल मायदा : 2).

बैंकों का अधिकतर मामला यह है कि वे ब्याज का लेनदेन करते हैं। इसलिए आपको इस तरीक़े को छोड़कर आजीविका कमाने के हलाल साधन की तलाश करनी चाहिए।

और अल्लाह ही तौफ़ीक़ (सामर्थ्य) प्रदान करने वाला है, तथा अल्लाह हमारे पैगंबर मुहम्मद, उनके परिवार और उनके साथियों पर दया एवं शांति अवतरित करे।”

“फतावा इस्लामिय्यह” (2/401, 402).

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

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