हर प्रकार
की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।
मुसलमानों
ने काफिरों से बीमारों को गुलाब के फूल भेंट करने और अपने मृतकों की समाधियों पर फूल
की मालाएं चढ़ाने का व्यवहार प्राप्त किया है, और यह दोनों चीज़ें बुरी (अवैध) हैं, काफिरों
(नास्तिकों) से उस बुरी आदत को ग्रहण करने की दृष्टि से
और पैसे की बर्बादी
की दृष्टि से, ऐसे गुलाबों और फूलों का क्या फायदा जिनके लिए पैसे खर्च किए जाते हैं
ताकि एक संछिप्त अवधि के बाद मुर्झा जाएं
और उनसे न किसी जीवित व्यक्ति को फायदा पहुँचे और न किसी मृतक
को ? !
तथा प्रश्न
संख्या: (1973), (14390)
और (85345)
के उत्तर देखें।
दूसरा:
कुछ शोधकर्ताओं
ने उल्लेख किया है कि फूलों की मालाएं पहनना (माल्यार्पण) वास्तव में ईसाईयों से ग्रहण
की गई एक आदत है,
जिसे वे अपने चर्चों में करते हैं,
इस अध्ययन में कहा गया है कि :
“ताज और फूल:
”
ताज या फूलों
की माला पहनना, इसका मूल स्रोत चर्चों का कार्य है, उनकी पुस्तकों में वर्णित है: आशीर्वाद
देने के बाद,
और दोनों जोड़ों
(पति पत्नी) के चर्च को छोड़ने के लिए तैयार हो जाने के बाद : यह एक सामान्य प्रतिक्रिया
थी कि विजय के चिह्न के तौर पर उन दोनों को एक ताज या फूलों की माला पहनाया जाये, और
उन दोनों की पवित्रता (सतीत्व) के प्रतीक के तौर पर भी।
डॉ. फातिमा बिन्त मुहम्मद आल जारल्लाह की पुस्तक
“तअम्मुलात व वक़फात मअ बाज़ि मज़ाहिरिल इर्स” से अंत हुआ।
इस पुस्तक
को शैख अब्दुल्लाह बिन जिबरीन रहिमहुल्लाह और शैख अब्दुर्रहमान अल-महमूद हफिज़हुल्लाह
ने पढ़ा और प्रस्तावना प्रदान किया है।
तथा हमने
शादी में फूल की माला पहनने का जो हुक्म उल्लेख किया है वह अक़ीक़ा और उसके अलावा अन्य
अवसरों में उससे विभिन्न नहीं होगा।
तथा इस बात
से अवगत होना उचित है कि आदतों के मामले विभिन्न देशों और विभिन्न स्थानों के एतिबार
से भिन्न होते हैं,
अतः,
यदि आपके यहाँ मामला वैसे ही है जैसा कि
यहाँ उल्लेख किया गया है कि यह आदत मूल रूप से काफिरों से ग्रहण की गई है,
चाहे वे ईसाई हों या उनके अलावा कोई अन्य
हो,
या चाहे वह आपके
देश में काफिरों की एक विशिष्ट आदत हो, या उनके किसी एक समूह का हो जैसे कि हिंदुओ
का, जैसाकि उनके बारे में इसका उल्लेख किया गया है,
या उनके अलावा अन्य समुदायों का हो। यदि मामला ऐसे ही है,
तो यह कार्य करना हराम (वर्जित और निषिद्ध)
है जो कि काफिरों (अविश्वासियों) के विशिष्ट कार्यों में से है,
या उनके कुछ धार्मिक आदतों से ग्रहण किया
गया है,
या जिसके द्वारा
किसी भी रूप से काफिरों के विशष्टि कार्यां से एकरूपता पाई जाती है।